बिजनेस कई लोग करते हैं लेकिन उनमें कुछ ही सफल होते हैं। कुछ सफल लोगों में से भी बहुत कम संख्या में ऐसे लोग होते हैं जो अपने बिजनेस के विस्तार को वैश्विक स्तर पर आकार दे पाते हैं। बिल्कुल बेसिक आइडिया के साथ होटल इंडस्ट्री को बदल देने वाले रितेश अग्रवाल उन्हीं चंद लोगों में शामिल हैं, जो ना केवल खुद सफल रहे बल्कि अपने बिजनेस को ग्लोबल लेवल पर भी लेकर गए।

21 साल के रितेश अग्रवाल की कहानी कोई साधारण कहानी नहीं है। आखिर भेड़ चाल से अलग चलना भला कितने लोग सोच पाते हैं?
हालाँकि, किसी आम बच्चे जैसा इनका भी बचपन था और 12वीं तक की पढ़ाई इन्होंने ज़रूर पूरी की, लेकिन चूंकि रितेश अग्रवाल व्यापारिक मारवाड़ी फैमिली से आते थे, इसीलिए इनके पिता इनसे दुकान खोल कर उस पर बैठने की जिद करने लगे थे।

हालांकि बड़े लोग छोटी चीजों में खुद को इन्वोल्व नहीं करते हैं, इसीलिए यह भागकर कोटा आ गए और वहां यह आईआईटी कोचिंग करने लगे। बाद में आईआईटी कोचिंग को छोड़कर वह दिल्ली के एक बिजनेस स्कूल में दाखिल हो गए और तमाम बिजनेस सेमिनारों में अपनी सोच को नया आयाम देने लगे।

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उन्होंने एनालाइज किया कि बिजनेस सेमिनार जो बड़े-बड़े शहरों में होती थी उसके लिए लोगों को महंगे होटल्स में रुकना पड़ता था और ज्यादा पैसे देने के बावजूद उन्हें अच्छी सर्विस नहीं मिलती थी।

बस यहीं से उनके दिमाग में नया स्टार्टअप शुरू करने का आईडिया आ गया और 2012 में आरवेल स्टेस नामक स्टार्टअप शुरू कर दिया।

इसके लिए उन्होंने अपना सब कुछ झोंक दिया था और इसके लिए उन्हें वेंचर नर्सरी से ₹3000000 का इन्वेस्टमेंट भी मिला। इसी प्रकार थीम फैलोशिप से उन्होंने 66 लाख रुपए की राशि भी जुटाई, लेकिन उनका पहला स्टार्टअप धीरे-धीरे घाटे में जाने लगा। चारों तरफ से आलोचनाएं होने लगीं और इस बिजनेस और घाटे को एनालाइज करते हुए रितेश ने समझ लिया कि ग्राहकों की जरूरत को समझना ज्यादा आवश्यक है।

इन्हीं सब आइडियाज के बीच 2013 में आरवेल स्टेस का नाम बदलकर ओयो रूम्स किया गया जिसका मीनिंग होता है आपके अपने कमरे। रितेश अग्रवाल ने ग्राहकों को सुविधाएं देने पर ज्यादा ध्यान केंद्रित किया और ग्राहकों तक बात पहुंची गई कि ओयो रूम्स में कम पैसे में ही बेहतर सुविधा वाली जगह उपलब्ध है।

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बस फिर क्या था दिन दूनी और रात चौगुनी रफ्तार से उनका यह वेंचर आगे बढ़ने लगा और 2014 में डीएसजी कंजूमर पार्टनर्स ने चार करोड़ का भारी-भरकम इन्वेस्टमेंट किया। फिर 2016 में सॉफ्टबैंक ने इसमें 7 अरब रुपए का इन्वेस्टमेंट किया और अब यह कंपनी ना केवल भारत में बल्कि मलेशिया इत्यादि दूसरे देशों में भी स्थापित होने लगी है। कहना अतिशयोक्ति नहीं है कि जो लोग अपने सपनों पर भरोसा रखते हैं वह ना केवल खुद को बल्कि दुनिया को भी राह दिखलाते हैं और रितेश अग्रवाल भी उनमें से एक हैं।

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